(मरकुस 1:40-45)
फिर एक दिन येशु जी के पास एक कोढ़ी आदमी आया। वह उनके पाँव में गिरकर विनती करने लगा, “अगर आप चाहें, तब मैं अच्छा हो सकता हूं!” तब येशु जी को दया आई और उन्होंने अपना हाथ उस पर रखकर कहा, “हां, मैं चाहता हूं, तू अच्छा हो जाए।” और उसका कोढ़ उसी समय जाता रहा और वह बिल्कुल ठीक हो गया।
तब येशु जी ने उसको अच्छी तरह से समझा कर कहा, “सुन, तू अपने चंगाई के बारे में किसी से मत कहना, लेकिन सीधे जाकर परमात्मा के नियम के अनुसार पुरोहित को दिखाकर भेट चढ़ाना, तब सब लोगों के लिये यह सबूत होगा कि तू चंगा हो गया है।”
पर उसने येशु जी का कहना नहीं माना और लोगों को अपने चंगाई के बारे में बताने लगा। इस कारण वहां बहुत भीड़ जमा हो गई, और येशु जी नगरों में नहीं जा सके। और वे एकांत स्थानों में रहने लगे। फिर भी गाँव-गाँव से लोग उनके पास आते थे।
प्रभु येशु कोढ़ी को स्वस्थ करते हैं
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?