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01. मरियम के साथ स्वर्गदूत की बात

(मरकुस 1:1, लुका 1:26-38)

यह परमात्मा के पुत्र प्रभु येशु के शुभ संदेश की शुरुआत है।

इस्राएल देश के नासरत नगर में मरियम नाम की एक यहूदी लड़की थी, जिसकी मंगनी योसफ नाम के लड़के के साथ हुई थी। मरियम की शादी होने से पहले परमात्मा ने अपने दूत को उसके पास भेजा। दूत ने मरियम के पास आकर कहा, “हे मरियम, परमात्मा की कृपा तुझ पर हुई है।” मरियम ने सोचा, “यह कौन है, और यह कैसी कृपा है?” तब परमात्मा के दूत ने कहा, “डर मत, देख, तू गर्भवती होकर एक पुत्र को जन्म देगी, और तू उनका नाम येशु रखना। वे महान होंगे और सब से बड़े परमात्मा के पुत्र कहलायेंगे और प्रभु परमात्मा उनको उनके पूर्वज दाविद का सिंहासन देंगे। और उनका राज्य हमेशा तक रहेगा।” मरियम ने कहा, “ये सब कैसे हो सकता है? अभी तक तो मेरी शादी भी नहीं हुई है।” तब दूत ने कहा, “यह ईश-आत्मा और उनके सामर्थ्य से होगा, क्योंकि उनके लिये कुछ भी करना असंभव नहीं है।” मरियम ने कहा, “जैसा परमात्मा चाहते है, मेरे साथ वैसा ही हो।” तब दूत वहां से गायब हो गया।

मरियम के साथ स्वर्गदूत बात करता है

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग