(मत्ती 1:18-25)
इसके बाद उसके मंगेतर योसफ को पता चला कि मरियम गर्भवती है। वह इस बात से परेशान था, कि यह किसका बच्चा होगा? वह उसको बदनाम भी नहीं करना चाहता था, क्योंकि वह एक अच्छा आदमी था। इसलिये उसने सोचा, “अगर मैं लोगों से कहूँगा कि मरियम ऐसी है वैसी है, तब उसकी बदनामी हो जायेगी। और नियम के अनुसार उसको मार देंगे।” तब वह चुपचाप उसको छोड़ने के लिये सोचता है।
जब सोचते-सोचते उसको नींद आ गई, तब परमात्मा ने उसके पास भी अपना दूत भेजा। और स्वर्गदूत ने आकर योसफ से कहा, “हे योसफ, तू मरियम के साथ शादी करने के लिये मत डर। क्योंकि उसके पेट में जो है, वे परमात्मा की तरफ से है, किसी आदमी का नहीं है। वह एक पवित्र पुत्र होगा और तू उसका नाम येशु रखना। जैसा परमात्मा ने वायदा किया था कि एक कुंवारी लड़की गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी जो अपने लोगों के पापों से उनको मुक्त कराएगा, वह वायदा अभी पूरा हो रहा है।” तब योसफ की नींद खुली और उसने कहा, “अरे, यह सच्ची बात है? जो मरियम के पेट में है, वह परमात्मा की तरफ से है, किसी आदमी का नहीं है!” और उसने स्वर्गदूत की उस बात पर विश्वास किया, और मरियम को शादी करके अपने घर लाया। लेकिन उसके पास तब तक नहीं गया, जब तक उसका पुत्र नहीं हो गया।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?