(लुका 2:1-7)
उस समय यहूदी लोग रोमी सरकार के गुलाम थे। रोमी सम्राट औगुस्तुस ने यह आज्ञा निकाली, की हर एक आदमी अपना नाम लिखाने के लिये अपने-अपने पूर्वजों के नगर जाये। योसफ जो दाविद के वंश का था, वह भी अपना नाम लिखाने के लिये बैतलहम नगर अपनी पत्नी मरियम के साथ आया। और वहां धर्मशाला में कहीं पैर रखने के लिये भी जगह नहीं थी, इसलिये योसफ और मरियम गाय के गौशाले में रहे।
अभी मरियम के बच्चा होने का दिन आ गया, और उसने वहां अपने पहले पुत्र को जन्म दिया। और उसे एक कपड़े में लपेटकर चरनी में रखा।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?