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12. प्रभु येशु आदमी में से भूत निकाल देते हैं

(मरकुस 1:21-28)

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विश्राम के दिन येशु जी कफरनहूम नगर में आकर सत्संग भवन में गये, और वहां परमात्‍मा की बातों के बारे में प्रचार करने लगे। लोग येशु जी के उपदेश सुनकर चकित रह गये क्योंकि वे दूसरे धर्म गुरुओं की तरह नहीं, पर अपने अधिकार से उनको उपदेश दे रहे थे।

उस समय उनके सत्संग भवन में एक आदमी ऐसा था जो भूत के वश में था। उसने चिल्ला कर कहा, “हे नासरत में रहने वाले येशु , तुम को हमसे क्या काम? क्या आप हमको नाश करने के लिये आये हो? मैं जानता हूं कि आप परमात्मा के भेजे हुए पवित्र आदमी हैं!”

लेकिन येशु जी ने उसे डांट कर कहा, “चुप रह! और इस आदमी मैं से बाहर निकल जा।” तब भूत उस आदमी को मरोड़ कर जोर से चिल्लाते हुए उस में से बाहर चला गया।

यह देखकर सभी लोग बहुत चकित रह गये और एक-दूसरे से पूछने लगे, “कितनी अद्भुत बात है कि वे भूतों को आज्ञा देते हैं और वे भी उसकी आज्ञा मानते हैं! और उनके उपदेश नए और अधिकार सहित होते है।“

इस प्रकार येशु जी की चर्चा जल्द ही पूरे गलील प्रदेश के कोने-कोने में फैल गई।

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग