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16. प्रभु येशु एक चुंगी लेने वाले को शिष्य बनाते हैं

(मरकुस 2:13-17)

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कफरनहूम से बाहर आकर येशु जी गलील के समुद्र के किनारे में जा रहे थे। फिर सारी भीड़ उनके पीछे आ गयी और येशु जी ने उनको परमात्मा का वचन सुनाया।

चलते-चलते येशु जी ने लेवी नाम के एक आदमी को देखा जो चुंगी घर में बैठकर रोमी सरकार के लिये चुंगी जमा कर रहा था। येशु जी ने उसे बुलाकर कहा, “मेरे साथ आओ!” और वह खड़ा हुआ और उनके पीछे चल पड़ा, और उनका शिष्य बन गया।

इसके बाद येशु जी अपने शिष्यों के साथ उसके घर में खाना खा रहे थे। चुंगी लेने वाले और दूसरे लोग भी जो धर्म गुरुओं की नजर में पापी माने जाते थे, वे भी उनके साथ थे, क्योंकि बहुत ऐसे लोग भी येशु जी के साथ गये थे। धर्म गुरुओं ने यह देखकर कि येशु जी चुंगी लेने वाले और दूसरे पापियों के साथ खाना खा रहे थे, येशु जी के शिष्यों से कहा, “तुम्हारे गुरु पापियों के साथ खाना क्यों खाते हैं? यह अच्छी बात नहीं है।” येशु जी ने ऐसा सुनकर उनसे कहा, “जो बीमार नहीं हैं उनको डाक्टर की कोई जरूरत नहीं, लेकिन जो बीमार हैं उनको डाक्टर की जरूरत होती है, इसी तरह मैं धर्मियों को नहीं, लेकिन पापियों को बचाने के लिये आया हूं।”

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग