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17. लोग प्रभु येशु से व्रत के बारे में पूछते हैं

(मरकुस 2:18-22)

एक दिन गुरु योहन के शिष्यों और धर्म गुरुओं ने व्रत रखा था, लेकिन येशु जी के शिष्यों ने व्रत नहीं रखा। यह देखकर कुछ लोग येशु जी के पास आकर कहने लगे, “गुरु योहन के चेले और धर्म गुरु व्रत करते हैं, लेकिन तुम्हारे चेले व्रत क्यों नहीं करते?” येशु जी ने उत्तर दिया, “जब तक दूल्हा बारातियों के साथ है, क्या बराती व्रत कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे खुश हैं। पर ऐसा दिन आयेगा जब कि दूल्हा बारातियों से अलग किया जाएगा। उस दिन वे व्रत करेंगे क्योंकि वे दुःखी होंगे।”

येशु जी इसके बारे में उदाहरण देकर समझाते हैं, “पुराने कपड़े में नये कपड़े का टुकड़ा नहीं लगाते हैं, क्योंकि नया कपड़ा धोने के बाद छोटा हो जाता है, जिससे पुराना कपड़ा और अधिक फट जाता है। और कोई भी आदमी नये अंगूर के रस को पुराने चमड़े के थैले में नहीं रखता है, क्योंकि अंगूर का रस बनने के समय फैलता है, जिस के कारण थैले को फाड़ देता है और अंगूर का रस और थैला दोनों बेकार हो जाते हैं। इसलिये हम नये अंगूर के रस को नये थैले में रखते हैं।”

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग