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18. प्रभु येशु विश्राम के दिन के भी प्रभु हैं

(मरकुस 2:23-28, 3:1-6)

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येशु जी सत्संग भवन से बाहर आकर शमौन और अन्‍द्रियास के घर में गये। तब लोगों ने उनको बताया कि शमौन की सास को बहुत बुखार है। येशु जी उसके पास गये, और उन्होंने उसका हाथ पकड़कर उसे उठाया। और उसी समय उसका बुखार ठीक हो गया और वह येशु जी की सेवा करने लगी।

फिर शाम के समय लोग बहुत बीमारों और भूत से भरे लोगों को येशु जी के सामने लाये। नगर के लोग दरवाजे के बाहर जमा हो गये। येशु जी ने बहुत प्रकार के बीमारियों से पीड़ित लोगों को अच्छा किया और बहुत लोगों में से भूतों को निकाला। येशु जी भूतों को बोलने नहीं देते थे क्योंकि भूत जानता था कि येशु जी कौन हैं।

येशु जी सुबह अंधेरे में ही उठे और गाँव से बाहर एकांत जगह में जाकर प्रार्थना करने लगे। इससे थोड़ी देर बाद शमौन और उसके साथी येशु जी को ढूंढ़ने के लिये गये। जब वे मिल गये, तब उन्होंने कहा, “आप कहां थे, सब लोग आप को ढूंढ़ रहे हैं!”

तब येशु जी ने उनसे कहा, “आओ, आस-पास के गाँवों में जाते हैं। मुझको वहां भी परमात्मा के बारे मैं बताना है, क्योंकि इसलिए ही मैं संसार में आया भी हूं।” और तब वे वहां से गलील के गाँवों में गये और येशु जी सत्संग भवनों में परमात्मा के बारे में बताने लगे और उन्होंने भूतों को भी निकाला।

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग