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19. लोग चारों ओर से प्रभु येशु के पास आते हैं

(मरकुस 3:7-19)

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फिर येशु जी और उनके चेले गलील के समुद्र की ओर गये। उनके पीछे एक बड़ी भीड़ आ गयी, जिसमें इस देश के चारों दिशाओं के लोग थे, क्योंकि यह समाचार फैल चुका था कि येशु जी बीमारों को अच्छा करते हैं। इसलिये बीमार लोग एक-दूसरे से आगे निकलते हुए येशु जी के पास आ रहे थे, कि वे उनको छू कर अच्छे हो सकते हैं। भीड़ से दबने से बचने के लिये येशु जी ने अपने शिष्यों से कहा, “एक नाव तैयार करो, जिसमें मैं बैठ सकूं।”

और भीड़ में ऐसे लोग भी थे जो भूत के वश में थे, और जब उन्होंने येशु जी को देखा, तब वे डर के मारे उनके पैरों में गिरने लगे और जोर-जोर से कहने लगे, “आप परमात्मा के पुत्र हैं!” लेकिन येशु जी ने उनको जोर देकर कहा, “लोगों को मत बताना कि मैं कौन हूं।”

फिर येशु जी पहाड़ में गये और जिनको चाहा उनको अपने पास बुलाया। और उन्होंने उनमें से बारह चेले तैयार किये कि वे उनके साथ रहें और वे उनको उपदेश करने के लिये भेजे, और उन्होंने उनको भूत को निकालने का अधिकार भी दिया।

वे बारह शिष्य ये हैं, शमौन जिसका नाम येशु जी ने पारस रखा, उसका भाई अन्द्रियास, जबदी का बेटा जयकर और योहन, फिलीप, बरतोलोमी, लेवी चुंगी लेने वाला जिसका दुसरा नाम मत्ती हैं, थोमा, हलफई का बेटा जयकर, तदै, शमौन जो रोमी सरकार के विरोधी दल का एक सदस्य था, और यहूदा इस्‍करियोती जो बाद में येशु जी को पकड़वाने वाला होगा।

प्रभु येशु बीमारों को ठीक करते हैं

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग