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24. प्रभु येशु के कहने पर आँधी-तूफान थम जाता है

(मरकुस 4:35-41)

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उस दिन शाम के समय जब वे समुद्र के किनारे में थे, तब येशु जी ने अपने शिष्यों से कहा, “आओ, हम समुद्र के पार चलते हैं।” और भीड़ छोड़ कर शिष्य येशु जी को नाव में ले गये। दूसरी नावें भी उनके साथ जाती रही।

तब समुद्र में एक जोरदार आँधी तूफान उठी और लहरें इतनी जोर से नाव में टकराईं कि वे पानी से भरने लगी।

उस समय येशु जी नाव के पीछे के भाग में तकिया लगाकर सोये थे। शिष्यों ने उनको उठाकर कहा, “हम डूब रहे हैं, आपको हमारी कुछ चिन्ता नहीं है?” येशु जी ने उठकर हवा को डाँटा और समुद्र से कहा, “शान्त हो जा, थम जा!” और हवा थम गई।

फिर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा, “तुम क्यों डर रहे हो? क्या तुमको अब तक विश्वास नहीं है?”

शिष्यों में बहुत डर छा गया और वे आपस में ऐसा कहने लगे, “हमारी समझ में कुछ नहीं आ रहा है कि ये कौन है, कि हवा और समुद्र भी इनका कहना मानते हैं!”

प्रभु येशु के कहने पर आँधी-तूफान थम जाता है

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग