(मरकुस 6:7-13)
येशु जी उपदेश देते-देते गाँव-गाँव में घूम रहे थे। और उन्होंने अपने बारह शिष्यों को अपने पास बुलाकर उनको भूतों को निकालने का अधिकार दिया, और येशु जी उनको दो-दो करके प्रचार करने के लिए भेजने लगे। येशु जी ने कहा, “रास्ते के लिये लाठी के अलावा कुछ नहीं ले जाना, ना रोटी, ना झोला और ना बटुए में पैसे। तुम पाँव में जूते पहन सकते हो पर दूसरा जोड़ा कपड़ा नहीं ले जा सकते हो। जो लोग तुमको अपने घर में बुलायें, उस स्थान से जाने तक वहीं रहना। जहां के लोग तुम्हारा न स्वागत करते हैं, न बात सुनते हैं, तब उस स्थान से जाने पर अपने पाँव की धूल तक यह दिखाने के लिये झाड़ लेना कि परमात्मा पक्का उनको सजा देंगे।”
और वे नगर नगरों में जाकर लोगों को अधर्म का रास्ता छोड़कर अच्छे रास्ते को अपनाने के लिये बता रहे थे। और उन्होंने बहुत लोगों में से भूतों को निकाला और बीमार लोगों के सिर में तेल रख कर उनको अच्छा किया।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?