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42. दूसरों को परमात्मा के रास्‍ते से नहीं भटकाना चाहिये

(मरकुस 9:42-48)

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लेकिन येशु जी ने ऐसा भी कहा, “जो परमात्मा पर विश्वास करता है, वह आदमी चाहे सब से छोटा ही क्यों ना हो, अगर कोई आदमी उसको परमात्मा के रास्‍ते से भटकाता है, तब परमात्मा उसको अवश्य बहुत कठिन सजा देंगे। इससे यह अधिक अच्छा होता कि कोई आदमी उसके गले में बड़ा चक्की का पाट बांधकर उसे गहरे ताल में फेंक देते, जिससे वह दूसरे को पाप करने के लिये नहीं उकसा सके और परमात्मा के द्वारा मिलने वाली कठिन सजा से बच जाये।

अगर तुम्हारा हाथ तुम को परमात्मा के रास्‍ते से भटकाता है, तब उसको काट दो। अधिक अच्छा है कि तुम एक हाथ के लूले होकर अमृत जीवन को पाओगे, कहीं ऐसा न हो कि तुम दो हाथ ले कर नरक में डाले जाओ, जहां की आग में तुम हमेशा तक जलते रहोगे।

अगर तुम्हारा पाँव तुम को परमात्मा के रास्‍ते से भटकाता है, तब तुम उसको काट दो। अधिक अच्छा है कि तुम एक पाँव के लंगड़े होकर अमृत जीवन को पाओगे, कहीं ऐसा न हो कि तुम दो पाँव लेकर भी नरक में डाले जाओ।

अगर तुम्हारी आँख तुम को परमात्मा के रास्‍ते से भटकाती है, तब तुम उसको निकाल दो। अधिक अच्छा है कि तुम एक आँख के अन्‍धे होकर परमात्मा के राज्य में प्रवेश करोगे, कहीं ऐसा न हो कि तुम दो आँख लेकर भी नरक में डाले जाओ, जहां आदमी हमेशा बहुत दुःख पाते हैं और वहां की आग में तुम हमेशा तक जलते रहोगे।”

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग