(लूका 12:22-34)
येशु जी ने फिर कहा, “मैं तुम से कहता हूं कि चिन्ता न करो, ना अपनी जिन्दगी के लिये कि हम क्या खायेंगे और न अपने शरीर के लिये कि हम क्या पहनेंगे। क्योंकि जीवन खाने, और तन कपड़े से बढ़कर है। तुम कौवों को ध्यान से देखो! वे ना तो बोते हैं और ना काटते हैं, ना तो उनके भंडार है और न आंगन। तब भी परमात्मा उनको खिलाते हैं। और तुम सब चिड़ियों से बहुत बढ़कर हो! क्या तुम चिन्ता कर के अपनी आयु का एक भी पल बढ़ा सकते हो? अगर तुम इतना छोटा काम भी नहीं कर सकते हो, तब दूसरी बातों के लिये चिन्ता क्यों करते हो?
फूलों को देखो कि वे कैसे बढ़ते हैं। वे ना तो मेहनत करते हैं और ना कोशिश करते हैं, फिर भी मैं तुम को बताता हूँ कि सालोम का राजा भी अपनी सारी शान-शौकत में भी उनमें से एक की तरह भी सजा-धजा नहीं था। हे कम विश्वास करने वालों, अगर परमात्मा मैदान की घास को जो आज है और कल आग में फेंक दिया जायेगा ऐसे पहनाते है, तब वे तुम को क्यों नहीं पहनायेंगे?
इसलिये तुम भी इस बात के लिये कुछ चिन्ता न करो कि हम क्या खायेंगे या क्या पहनेंगे दुनिया के सब लोग इन चीजों के पीछे दौड़ते हैं, पर तुम्हारा पिता परमात्मा जानता कि तुम को इन सब चीजों की जरूरत है। इसलिये तुम सब से पहले परमात्मा के राज्य की ओर अपना मन लगाओ, तब ये सब चीज भी तुम को अपने आप मिल जायेंगी।
ओ छोटे झुण्ड, नहीं डर, क्योंकि तुम्हारे पिता परमात्मा ने तुम को अपने राज्य देने की कृपा की है। अपनी सम्पत्ति को बेचकर दान कर दो। तब तुम अपने लिये ऐसा बटुवा बनाओ जो कभी नहीं फटता, और परम स्वर्ग में कभी नहीं नाश होने वाला धन जमा करो। वहां ना तो कोई चोर आता है और ना कीड़े खाते हैं। क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वही तुम्हारा मन भी लगा रहता है।”
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?