कहानियों का सूची

57. दुनिया का उजाला

(योहन 8:2-19)

00:00
02:12

येशु ने लोगों से फिर कहा, “दुनिया का उजाला मैं हूं। जो मेरी बात मानेंगे वह कभी अंधेरे में नहीं चलेंगे, क्योंकि उनको जीवन का उजाला मिलेगा।” धर्म गुरुओं ने उनसे कहा, “तुम खुद अपने बारे में बता रहे हो, हम यह कैसे मानें।” येशु ने कहा, “हां, यह मैं अपने बारे में खुद कह रहा हूं, लेकिन फिर भी मेरी बात सच है। क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं कहां से आया हूं, और कहां जा रहा हूं। लेकिन तुम नहीं जानते कि मैं कहां से आया हूं और कहां जा रहा हूं।

तुम लोगों के बारे में न्याय करते हो लेकिन मैं किसी का न्याय नहीं करता। और अगर न्याय करूँ भी तब मेरा फैसला सही होगा। क्योंकि मैं अकेला नहीं हूं, क्योंकि पिता जिन्होंने मुझे भेज रखा है मेरे साथ हैं। तुम्हारे नियम में लिखा है कि अगर दो लोग न्यायालय में एक ही बात बताते हैं, तो यह बात सच मानी जाती है। जो मैं अपने बारे में बता रहा हूं, मेरे पिता जिन्होंने मुझे भेज रखा है वे भी बताते हैं।” तब उन्होंने येशु से कहा, “कहां हैं तुम्हारे पिता?” येशु जी ने उनसे कहा, “न तो तुम मुझे जानते हो और न मेरे पिता को। अगर तुम मुझे जानते, तब मेरे पिता को भी जानते।”

दुनिया का उजाला मैं हूं

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग