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59. धर्म गुरु प्रभु येशु को फसाना चाहते थे

(मरकुस 12:13-17)

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कुछ धर्म गुरु और राज्यपाल हेरोदेस के दल के लोग येशु जी के पास आये, क्योंकि यहूदी नेताओं ने उनको येशु जी की परीक्षा लेने के लिये भेज रखा था। इसलिये वे आकर येशु जी से बोले, “गुरु जी, हम यह जानते है कि तुम सच्चे हो। तुम किसी की परवाह भी नहीं करते, और किसी के मुंह देखकर बात भी नहीं करते बल्कि सच्चाई से परमात्मा के रास्‍ते का उपदेश देते हो। इसलिये अभी हमको बताये, क्या परमात्मा के आदेश संहिता के अनुसार रोमी शासक को चुंगी देना अच्छा है या नहीं है?”

येशु जी ने उनके छल कपट को भांपकर कहा, “मेरी परीक्षा क्यों लेते हो? एक सिक्का लाओ और मुझे दिखाओ।” तब वे एक सिक्का लाये। येशु जी ने उन से पूछा, “इस सिक्के में किसी का मुंह और किसका नाम है?” उन्होंने उत्तर दिया, “रोमी शासक का।” इतने में येशु जी ने उन से कहा, “जो शासक का है उसे शासक को दो, और जो परमात्मा की है उसे परमात्मा को दो।” यह बात सुनकर कि यीयेशु शु जी हमारी चाल में नहीं फंसे वे लोग चकित हो पड़े।

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग