(मरकुस 12:18-27)
फिर सदूकी दल के धर्म गुरु जो मानते थे कि मरने के बाद जीवन नहीं है, उन्होंने येशु जी के पास आकर उन से ये सवाल पूछा, “गुरु जी, मोशेश ने हमारे लिये यह आदेश संहिता बना रखा था कि अगर किसी का भाई अपनी पत्नी के रहने तक बिना संतान मर जाता है, तब उसका भाई उस विधवा के साथ शादी कर के अपने भाई के लिये संतान पैदा कर सकता है, जिससे उसका वंश आगे को बढ़ सकता है?
अब इस बात को सुनो। सात भाई थे और पहले वाले की शादी हुई, लेकिन वह बिना संतान मर गया। फिर दूसरे भाई ने उस विधवा के साथ शादी की, और वह भी बगैर संतान मर गया। फिर तीसरे ने, और उसके साथ भी ऐसा ही हुआ। और इसी तरह सातों भाई बिना संतान मर गये, और उसके बाद वह औरत भी मर गयी। जब वे परमात्मा के न्याय करने के दिन में फिर ज़िंदा होंगे, तब वह औरत किस की पत्नी होगी? क्योंकि वह तो सातों भाइयों की पत्नी रही थी।”
तब येशु जी ने उन से कहा, “तुम्हारा दिमाग ठीक है या नहीं है? न तो तुम धर्म-ग्रंथ को जानते हो और न परमात्मा की सामर्थ्य को। क्योंकि जब लोग उस दिन ज़िंदा होंगे, तब वे शादी नहीं करेंगे और नहीं अपनी लड़की को शादी के लिये देंगे, बल्कि इस मामले में वे स्वर्गदूतों की तरह होंगे जो शादी नहीं करते।
इसके अलावा तुम यह बात नहीं मानते कि लोग मरे हुओं से फिर ज़िंदा हो जायेंगे, लेकिन धर्म-ग्रंथ में मोशेश के बारे में लिख रखा है कि जब उसके साथ परमात्मा ने आग की झाड़ी से बात की, उन्होंने कहा कि मैं तेरे पूर्वज अब्राहम, इसहाक और जयकर का परमात्मा हूं। अगर परमात्मा अभी तक हमारे पूर्वजों के परमात्मा हैं, जब कि वे बहुत पहले मर गये, इस से तो साफ हो जाता है कि वे दुबारा फिर जीवित होंगे। क्योंकि परमात्मा मरे हुओं के नहीं बल्कि जीवितों के परमात्मा हैं। अगर तुम सोचते हो कि मरे लोग दुबारा जीवित नहीं होते, तब तुम अभी तक कुछ नहीं समझते।”
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?