(मरकुस 13:14-37)
येशु जी ने फिर कहा, “उस समय एक दुष्ट आदमी परमात्मा के मंदिर में जाकर उसको अशुद्ध करेगा, जिसके कारण परमात्मा अपने घर को छोड़ देंगे।
उस समय जो आदमी यहूदा प्रदेश में हों, वे भागकर पहाड़ों में चले जाएं। और जो छत पे हों, वे कुछ भी समान को लाने के लिये अन्दर न जाएं, पर वहां से भाग जाएं। और जो खेतों में हों, वे भागकर अपनी चादर लेने के लिये भी पीछे घर ना लौटें।
उन औरतों के लिये जो उस समय गर्भवती होंगी और उनके लिये जो बच्चों को दूध पिलाती हैं, उस समय उनके लिये कितना दुःख का समय होगा!
प्रार्थना करो कि ये सब बरसात के दिनों में ना हो! क्योंकि उन दिनों ऐसा दुःख कष्ट होगा, जैसा परमात्मा के दुनिया की शुरुआत करने से आज तक ना हुआ और ना कभी होगा। अगर परमात्मा ने उन दिनों को घटाया ना होता, तब कोई भी प्राणी नहीं बचता। लेकिन उन्होंने अपने चुने लोगों के कारण से उन दिनों को घटा दिया था।”
येशु जी ने फिर बताया, “दुनिया के अन्त से पहले लोग तुम से ऐसा कहेंगे, “देखो, हमारे मुक्तिदाता यहां हैं, या वहां हैं,” लेकिन तुम उन पर विश्वास मत करना। क्योंकि ऐसे लोग आयेंगे जो कहेंगे कि मैं मुक्तिदाता हूं, या मैं परमात्मा का दूत हूं, लेकिन तुम उन पर विश्वास नहीं करना। और वे अद्भुत काम भी दिखाकर परमात्मा के चुने लोगों को बहकायेंगे, पर वे सफल नहीं होंगे। इसलिये तुम सावधान रहना, क्योंकि मैंने तुम को बता दिया है कि दुनिया के अन्त से पहले क्या-क्या होगा।
और ऐसा होगा जैसा परमात्मा के सेवक योएल ने कह रखा है,
“उस समय इस दु:ख-कष्ट के बाद सूरज अन्धकारमय हो जाएगा, और चन्द्रमा का उजाला भी मिट जाएगा।
आकाश से तारे गिरने लगेंगे और पूरे ब्रह्माण्ड को झिंझोड़ा जाएगा।”
और मैं जो परमात्मा की ओर से आया हूं, सारे लोग मुझे सामर्थ्य और महिमा के साथ बादल में आते देखेंगे। और मैं अपने स्वर्गदूतों को भेजकर दुनिया के चारों ओर की दिशाओं से अपने चुने लोगों को जमा करूंगा।”
फिर येशु जी ने शिष्यों से कहा, “इस अंजीर के पेड़ को देखो और इसे देखकर सीख लो। जैसे उसकी टहनियां कोमल हो जाती हैं और उनमें नये-नये अंकुर फूटने लगते हैं, तब तुम समझ जाते हो कि गरमी के दिन नजदीक हैं, इसी तरह जब तुम ये सारी बातों को होते देखोगे जो मैंने तुम को बताईं थीं तब जान लेना कि मैं नजदीक हूं बल्कि दरवाजे पर हूं। मैं तुम से सच कहता हूं कि इस पीढ़ी का अन्त तब तक नहीं होगा, जब तक ये सब पूरा नहीं हो जाएगा। यह आकाश और धरती भी नाश हो जायेगी, पर मेरे वचन कभी खत्म ना होंगे, वे हमेशा तक सच रहेंगे।”
येशु जी ने फिर कहा, “केवल पिता परमात्मा जानते हैं कि मैं धरती में कब वापिस आऊँगा और मैं उनका पुत्र भी इसके बारे में कुछ नहीं जानता, और न कोई स्वर्गदूत जानते हैं।
सावधान रहो और सोना मत क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आयेगा। ऐसा है जैसे कोई आदमी अपना घर छोड़ कर विदेश चला जाता है। वह अपने घर का भार अपने दासों को सौंप जाता है और हर एक को उनका काम बता जाता है, और चौकीदार को उठे रहने की आज्ञा दे जाता है।
तब तुम भी उन दासों के जैसे अपनी आँखों को खुला रखना और मैं जो तुम्हारा प्रभु हूं, मेरा इंतजार करना क्योंकि तुम नहीं जानते कि मैं परम स्वर्ग जाकर दिन में या रात को कब वापिस आऊँगा। इसलिये तुम जागते रहो, क्योंकि कही ऐसा नहीं हो कि मैं अचानक आ जाऊं और तुम को सोया पाऊं।
जो बात मैंने तुम से कह रखी थी वही फिर मैं सब से कहता हूं, कि सोना मत उठे रहो।”
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?