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65. एक औरत प्रभु येशु पर इत्र लगाती है

(मरकुस 14:1-11)

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उस समय यहूदी लोग अपने पूर्वजों के मिस्रियों की गुलामी से आजाद होने की यादगारी में हर वर्ष फसह नाम का एक त्यौहार मनाया करते थे। जब त्यौहार के दो दिन बचे थे, तब पुरोहितों के साहब और धर्म गुरु येशु जी को चुप-चाप से पकड़ कर उनको मारने की तरकीब सोचने लगे। फिर भी वे ऐसा कहते थे, “त्यौहार के दिनों में नहीं, क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि लोग हमारे साथ दंगा-फसाद करें।” क्योंकि बहुत लोग येशु जी को अच्छा मानते थे।

उस समय जब येशु जी बैतनिया गाँव में अपने शिष्यों के साथ किसी के घर में खाना खा रहे थे, तब एक औरत बहुत महंगा इत्र ले कर वहां आई। और उसने वह सब येशु जी के सिर पर अपने प्रेम को दिखाने के लिये डाल दिया।

लेकिन जो लोग वहां थे उनमें से कुछ लोग यह कहने लगे, “इसने इस इत्र को बरबाद क्यों किया? यह इत्र बहुत अनमोल था और इसे बेचकर उन पैसों को गरीबों में बांटा जा सकता था।” और उन्होंने यह कहकर उस औरत को डाँटा।

लेकिन येशु जी ने उन से कहा, “तुम इसको परेशान क्यों कर रहे हो? इसको छोड़ दो, क्योंकि इसने मेरे लिये अच्छा काम कर रखा है। गरीब तो तुम्हारे साथ हमेशा रहते हैं। जब भी तुम चाहोगे तुम उनकी मदद कर सकते हो, पर मैं तुम्हारे साथ हमेशा नहीं रहूंगा। जो भी यह कर सकती थी इसने वही किया। उसने मेरे मरने से पहले मुझे दफनाने के लिये मेरे तन में खुशबू लगा ली है। मैं तुम से सच कहता हूं, सारे दुनिया में जहां भी मेरा शुभ संदेश सुनाया जाएगा, वहां इसकी याद में जो भी इसने किया इसका जिक्र पक्का होगा!”

तब यह देखकर यहूदा करियोती जो उनके बारह शिष्यों में से एक था, वह पुरोहितों के साहबों के पास गया और येशु जी को पकड़ा देने का वायदा कर आया। वे यह बात सुनकर खुश हुए और उन्होंने उसको धन देने का वादा किया। और यहूदा येशु जी को पकड़वाने के मौके में लग गया।

एक स्त्री प्रभु येशु पर इत्र लगाती है

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग