(मरकुस 14:43-50)
जब येशु जी ऐसा कह रहे थे, उस समय यहूदा करियोती वहां आया। उसके साथ लाठी-तलवार लेकर एक भीड़ भी थी, जिन को पुरोहितों के साहब, धर्म गुरुओं ने और प्रधानों ने भेज रखा था। यहूदा ने उनको यह बता रखा था कि जिसको मैं गले से लगाऊँगा, वही येशु जी होंगे। तुम उनको पकड़ कर अच्छे से ले जाना। यहूदा ने सीधे येशु जी के पास जाकर कहा, “गुरु जी!” और उसने उनको गले से लगाया। येशु जी के साथियों ने यह देखकर कि क्या होने वाला है, उनसे कहा, “प्रभु! क्या हम इनपर हमला करें?” और उनमें से एक ने महापुरोहित के नौकर का कान एक बड़े चाकू से उड़ा दिया, पर येशु जी ने कहा, “नहीं, नहीं, बहुत हो गया है।” और उन्होंने उसका कान छूकर अच्छा कर दिया। फिर येशु जी ने भीड़ से कहा, “मैंने क्या अपराध कर रखा है कि तुम मुझे पकड़ने के लिये लाठी-तलवार ले कर आये हो? जब मैं रोज परमात्मा के मंदिर में उपदेश देते तुम्हारे साथ था, तब तुम ने मुझे नहीं पकड़ा। पर अब यह इसलिये हो रहा है कि परमात्मा के वचन पूरे हों।” तब उन्होंने येशु जी को पकड़ कर अपने कब्जे में कर लिया। पर उनके शिष्य उनको छोड़ कर भाग पड़े।
प्रभु येशु की गिरफ्तारी
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?