(मत्ती 27:62-66)
दूसरे दिन विश्राम का दिन था। पुरोहितों के अधिकारियों ने और धर्म गुरुओं ने एक साथ पिलातुस के महल में जाकर उससे कहा, “महाराज, हमको याद है, कि उस धोखे बाज येशु ने अपने जीवित रहते कह रखा था, कि मैं तीसरे दिन ज़िंदा होऊँगा। इसलिये, महाराज, कब्र में तीसरे दिन तक हिफाजत करने का आदेश दिया जाए। कहीं ऐसा नहीं हो कि उसके चेले आकर उसकी लाश को छिपा दें, और सब लोगों से कहें कि वह मरे हुओं में से जीवित हो गये हैं। यह उसकी पहले की शिक्षा से भी अधिक खतरनाक होगा!”
यह सुनकर पिलातुस ने उनसे कहा, “ठीक है, तुम पहरेदार ले जाओ और जैसा भी अच्छा समझते हो उसकी हिफाजत की तैयारी करो।” इसलिये उन्होंने कब्र के मुंह पर रखे पत्थर पर मुहर लगायी और वहाँ चौकीदार बैठाये कि वे कब्र की सुरक्षा करें।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?