(मरकुस 15:42-47)
अभी शाम हो गयी थी और यह विश्राम के दिन से पहले का दिन था। वहां एक आदमी था जिसका नाम योसफ था। वह यहूदी न्यायालय का इज्जतदार आदमी था जो परमात्मा के राज्य की बहुत इंतजारी में था। वह साहस करके राज्यपाल पिलातुस के सामने गया और उसने उससे येशु जी की लाश मांगी। यह सुनकर पिलातुस चौंक पड़ा कि वह इतनी जल्दी मर गया। तब उसने सेनापति को बुलाकर पूछा कि येशु जी को मरे कितना समय हो गया है? तब सेना के साहब से यह खबर पाकर कि येशु जी सच में मर गया है, तब पिलातुस ने योसफ को उसकी लाश दिलवा दी।
तब योसफ ने एक कफन खरीदा और येशु जी को क्रूस में से उतारा। और उसने उनको कफन में लपेटकर एक बन्द गुफा में खुदी कब्र में रख दिया और कब्र के दरवाजे में एक बड़ा पत्थर लगा दिया।
और मरियम मगदलीनी और योसेस की माता मरियम यह देख रही थी कि उनको कहां रख रहे हैं। और उसके बाद वे घर जाकर उनमें लगाने के लिये मशाले और खुशबूदार इत्र तैयार करने लगे।
प्रभु येशु के शिष्य उनकी लाश को कब्र में रख देते हैं
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?