(मरकुस 15:33-41, मत्ती 27:49)
दिन दोपहर में पूरी दुनिया में अंधेरा हुआ और तीन बजे तक रहा। तब तीन बजे येशु जी ने अपनी भाषा में जोर से पुकारा, “एलोई, एलोई, लमा सबकतानी?” जिसका अर्थ है, “हे मेरे परमात्मा, हे मेरे परमात्मा, आपने मुझे क्यों छोड़ दिया?” यह सुनकर सामने खड़े हुए कुछ लोगों ने कहा, “देखो, यह परमात्मा के सेवक एलिय्याह को पुकार रहा है।” इतने में उन में से एक पनसोख्ता लगाये डंडा लेकर आया और उसको सिरके में डुबाकर येशु जी को चुसाने के लिये ले कर गया। तब दूसरे ने कहा, “रहने दो, अभी हम देखते हैं कि एलिय्याह इसे बचाने के लिये आता है या नहीं आता!” इसके बाद येशु जी के मुंह से जोर से आवाज निकलने के बाद उन्होंने अपने प्राण छोड़ दिये।
तब यरुशलेम में परमात्मा के मंदिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकड़े हो गये।
जो रोमी सेनापति येशु जी के सामने खड़ा हुआ था, उसने उनका ऐसे मरने को देखकर कहा, “सच में यह आदमी परमात्मा का पुत्र था!”
कुछ औरतें दूर खड़ी होकर देख रही थीं। जिसमें मरियम मगदलीनी, सलोमी, और छोटे जयकर और योसेस की माता मरियम थी। जब येशु जी गलील में थे तब ये औरतें उनके साथ जाती थीं और उनकी सेवा करती थीं। और वहां और भी बहुत औरतें थीं जो येशु जी के साथ यरुशलेम तक आयी थीं।
प्रभु येशु मर जाते हैं
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?