कहानियों का सूची

74. प्रभु येशु क्रूस पर चढ़ाये जाते हैं

(मरकुस 15:21-32, लूका 23:39-43)

00:00
03:27

सैनिक येशु जी को क्रूस पर चढ़ाने के लिये नगर के बाहर ले जा रहे थे। उस समय कुरेन देश का नवासी शमौन नाम का एक आदमी यरुशलेम जाकर उस रास्‍ते से आ रहा था। सिपाहियों ने उसको पकड़ा और येशु जी के क्रूस को ले जाने के लिये मजबूर कर दिया। और वे येशु जी को गुलगुता नाम के स्थान में ले गये जिसका अर्थ है खोपड़ी के जैसा स्थान। वहां सैनिक अंगूर के रस में दवाई रख कर येशु जी को देने लगे, ताकि वे कील ठोकने पर कष्ट कम महसूस करे, पर उन्होंने नहीं पिया। उसके बाद उन्होंने उनको कील ठोक कर क्रूस पर टांग दिया।

और उनके कपड़ों को आपस में बांटने के लिये कि किस को क्या मिलेगा करके पर्ची डालकर आपस में बांट लिये।

जब उन्होंने येशु जी को क्रूस पर चढ़ाया, उस समय सुबह के नौ बजे थे। उन्होंने उनके क्रूस पर यह दोषपत्र टांग दिया कि यह यहूदियों का राजा है। और उनके साथ दो डाकू भी अलग-अलग क्रूस पर चढ़ा रखे थे, एक को दाहिने ओर और दूसरे को बाये ओर।

जब येशु जी के पास से लोग जा रहे थे, तब वे सिर हिला हिलाकर कह रहे थे, “अरे वाह, तू वही हैं जो ऐसा कह रहा था कि मैं परमात्मा के मंदिर को तोड़कर फिर तीन दिन में तैयार कर दूंगा। पर तू अभी क्रूस से उतरकर अपने को बचा!” और इसी तरह पुरोहितों के साहब और धर्म गुरुओं ने भी येशु की हंसी की। और वे आपस में कहने लगे, “इसने दूसरों को बचाया, क्या यह अपने को नहीं बचा सकता है? अगर यह मुक्तिदाता है और सच में यहूदियों के राजा हैं, तब वह क्रूस से नीचे उतर आयेगा। तब हम विश्वास करेंगे कि वह परमात्मा का भेजा जन है!”

येशु जी के बगल में लटकाया एक डाकू येशु जी से कहने लगा, “तू मुक्तिदाता है, ना? अभी तू अपने को इस क्रूस से बचा, और हमको भी!” लेकिन दूसरे डाकू ने उसे डांटकर कहा, “क्या तू परमात्मा को देखकर नहीं डरता? हमको हमारी करनी की सही सजा मिल रही है, लेकिन इन्होंने कोई भी अपराध नहीं किया है।” यह कहकर उसने येशु जी से कहा, “येशु जी, जब आप अपने राज्य में प्रवेश करें, तब आप मुझे न भूलना।” तब येशु जी ने उससे कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, तू आज ही मेरे साथ परम स्वर्ग में होगा।”

प्रभु येशु क्रूस पर चढ़ाया जाता है

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग