(मरकुस 15:1-20)
जैसे ही सुबह हुई, तब न्यायालयों के लोग आपस में बात करने लगे कि हम येशु में दोष कैसे लगा सकते हैं। तब वे उनको बांध कर रोमी राज्यपाल पिलातुस के पास ले गये और उन्होंने उसको बताया, “यह अपने को यहूदियों का राजा बताता है!” तब पिलातुस ने येशु जी से पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा हैं?” येशु जी ने कहा, “जैसा तुम कह रहे हो, ऐसा ही है।” फिर पुरोहितों के साहब ने येशु जी पर बहुत अधिक झूठे दोष लगाये।
तब पिलातुस ने येशु जी से कहा, “तू उत्तर क्यों नहीं दे रहा है? देख, ये कितनी बातों के बारे में तुझ पर दोष लगा रहे हैं!” फिर भी येशु जी ने उसको कोई उत्तर नहीं दिया। यह देखकर पिलातुस को बड़ा ताजूब हुआ।
इस त्यौहार के मौके में पिलातुस एक कैदी को उनके लिये छोड़ देते थे। अभी बरअब्बा नाम का एक कैदी दंगा-फसाद करने वाले लोगों के साथ कैद खाने में बन्द था जिसने दंगे फसाद में खून किया था। तब लोग पिलातुस के पास आये और उससे विनती करके कहने लगे, “जैसा तुम ने आज तक हमारे लिये कर रखा है, वैसा ही अभी भी करें।” पिलातुस ने उन से पूछा, “तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये येशु जिसको तुम यहूदियों का राजा कहते हो, उसको छोड़ दूं?” पिलातुस ने ऐसा इसलिये कहा क्योंकि वह जानता था कि पुरोहितों के साहब ने चिढ़कर येशु जी को पकड़ा था।
लेकिन पुरोहितों के साहब ने लोगों को भड़का रखा था कि येशु जी को नहीं पर बरअब्बा को हमारे लिये छोड़ दीजिये, और सब लोगों ने ऐसा ही कहा। यह सुनकर फिर पिलातुस ने उनसे पूछा, “जिसको तुम यहूदियों का राजा कहते हो, उसका मैं क्या करूं? बताओ, तुम क्या चाहते हो?” उन्होंने चिल्लाकर कहा, “उसको मारने के लिये क्रूस पर टांग दो!” तब पिलातुस ने उन से पूछा, “क्यों, इस ने क्या गलती कर रखी है?” लेकिन लोगों ने और भी अधिक जोर से चिल्लाकर कहा, “उसको क्रूस पर टांग दो!”
पिलातुस भीड़ को खुश करना चाहता था और इसलिये उसने बरअब्बा को उनके लिये छोड़ दिया। और येशु जी को कोड़े की अति मार लगवाकर क्रूस पर चढ़ाने के लिये सैनिकों के हाथ में दे दिया।
तब सैनिक येशु जी को रोमी राज्यपाल के महल के बाहर से आंगन में ले गये और उन्होंने अपनी पूरी पलटन को वहां बुला लिया। और उन्होंने येशु जी को बैंगनी रंग के कपडे़ पहनाये जैसा एक राजा पहनता था और कांटों का एक मुकुट बनाकर येशु जी के सिर पर रख दिया। और वे मजाक से येशु जी को सलामी देने लगे और कहने लगे, “हे, यहूदियों के राजा जी, तुम को हमारा नमस्कार है!” और वे येशु जी के सिर को लकड़ी के डंडे से मार रहे थे और उन पर थूक रहे थे और फिर मजाक से घुटने टेक कर उनके आगे से प्रणाम कर रहे थे। जब उन्होंने जमकर उनका मजाक उढ़ा लिया था तब उनके बैंगनी कपडे़ को उतार कर उनको उन्हीं के कपडे़ पहनाये। और फिर उनको क्रूस पर चढ़ाने के लिये वहां से बाहर लाये।
सैनिक प्रभु येशु को कोढ़े की मार लगाते हैं
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?