(प्रेरितों 1:1-10, मत्ती 28:16-20)
इसके बाद शिष्य एक पहाड़ में गये जहां जाने की आज्ञा येशु जी ने उनको दे रखी थी। वहां पहुंचकर इन्होंने प्रभु येशु की बढ़ाई की। लेकिन किसी-किसी को शक भी हुआ।
तब येशु जी ने इनसे कहा, “मुझे परम स्वर्ग और धरती में पूरा अधिकार दे रखा है। इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को मेरा शिष्य बनाओ और उनको पिता परमात्मा, मैं उनका पुत्र और हमारे ईश-आत्मा के नाम से जल-दीक्षा दो। और मैंने जो-जो आज्ञा तुम को दे रखी है, तुम वे सब उनको मानना सिखाओ। देखो, मैं दुनिया के अन्त तक हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा!”
उन्होंने अपने शिष्यों को यह आज्ञा देकर कहा, “तुम मेरे जाने के बाद यरुशलेम को नहीं छोड़ना, पर परमात्मा की बातों के पूरा होने का इंतजार करना, जो मैंने तुम को बता रखी थी। जैसे गुरु योहन ने तुम को जल-दीक्षा से शुद्ध किया वैसे ही अभी तुम को ईश-आत्मा से शुद्ध करा जाएगा।”
शिष्यों ने उनसे पूछा, “हे प्रभु, क्या आप रोमियों को हराकर इस्राएली राज्य को अभी दुबारा बनाओगे?” उन्होंने उत्तर दिया, “समय और काल के बारे में जो पिता परमात्मा ने ठहरा रखा है, उसके बारे में तुम नहीं सोचो। पर जब ईश-आत्मा तुम में आयेगा, तब तुम सामर्थ्य पाओगे। और यरुशलेम, यहूदिया, सामरिया और पूरे धरती के कोने-कोने में तुम मेरे गवाह होंगे।”
फिर उनको देखते-देखते येशु जी स्वर्ग में उठाये गये, और बादल ने आकर उनको उनकी आँखों से ओझल कर दिया।
जब वे ऊपर को देख रहे थे, तब अचानक सफेद कपडे़ पहने दो आदमी उनके सामने खड़े होकर उन से कहने लगे, “हे गलीली लोगों, तुम आकाश की ओर क्या देख रहे हो? ये येशु जी जिनको तुम परम स्वर्ग में जाते देख रहे हो, एक दिन वे दुबारा इसी तरह आयेंगे!” इसके बाद शिष्य फिर यरुशलेम आये।
प्रभु येशु के शिष्यों ने दूसरे लोगों को बताया कि येशु जी दुबारा जीवित हो गये। बहुत लोग विश्वास करके यह बात मानने लगे कि येशु जी सच में हमारे मुक्तिदाता है। पर यहूदी नेताओं को यह बात अच्छी नहीं लगी। और वे विश्वासियों को सताने लगे। इसलिये उनमें से बहुत लोग इस्राएल देश छोड़ कर दूसरे देशों में रहने लगे, लेकिन वहां भी वे प्रभु येशु के बारे में बताने लगे। इस प्रकार प्रभु येशु का शुभ संदेश दुनिया के चारों ओर फैल गया। बहुत पंडित मानते हैं कि थोमा, जो प्रभु येशु के विशेष शिष्यों में से एक थे, उसने भारत में आकर प्रभु का संदेश फैलाया। दूसरे लोगों ने प्रभु का वचन अफ्रीका और यूरोप के देशों में भी फैलाया। पूरी दुनिया में लोग यह सुनकर कि प्रभु ने हमारे लिये एक मुक्तिदाता को भेज रखा है, बहुत खुश हुए, और परमेश्वर को मानने लगे। और उन्होंने प्रभु येशु जी में यह विश्वास किया कि बस यही परमेश्वर के भेजे हुए मुक्तिदाता हैं।
प्रभु येशु परम स्वर्ग में उठाये जाते हैं
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?