(मरकुस 1:12-15)
येशु जी के जल दीक्षा लेने के बाद ईश-आत्मा ने उनको रेगिस्तान को जाने के लिये कहा। वे चालीस दिनों तक वहां रहे। और वहां शैतान ने हर प्रकार से लालच देकर उनकी परीक्षा ली, ताकि येशु जी परमात्मा के सामने पाप में गिर जाये। लेकिन आखिर में शैतान अपनी योजना सफल नहीं हुआ। और जब चालीस दिन पूरे हो गये, तब स्वर्गदूतों ने आकर येशु जी की सेवा-टहल कर दी।
इसके बाद येशु जी गलील प्रदेश में गये और परमात्मा के शुभ संदेश का प्रचार करने लगे। उन्होंने लोगों से कहा, “परमात्मा के राज्य का समय नजदीक आ गया है। इसलिए अधर्म का रास्ता छोड़कर शुभ संदेश में विश्वास करके चलो!”
प्रभु येशु की परीक्षा
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?