(मरकुस 6:17-29)
उस समय हेरोदेस राजा का पुत्र हैरोदेस अंतिपस वहां का राज्यपाल था। वह अपने भाई की पत्नी हेरोदिया को अपने घर लाया था। इसलिये गुरु योहन ने उससे कहा, “जब कि तुम्हारा भाई जीवित है, तुम उसकी पत्नी को क्यों रख रहे हो? तुम को ऐसा नहीं करना चाहिये।” इसलिये राज्यपाल की यह प्रेमिका गुरु योहन से बहुत नफरत करने लगी और वह मौके की तलाश में रहती थी कि कैसे उसको मरवाया जाये। यह बात सुनकर राज्यपाल धर्म-संकट में पड़ गया और उसने उसको जेल में बन्द कर दिया, जहां उसको कोई दुःख नहीं पहुंचा सके। क्योंकि वह उसे एक पवित्र और धार्मिक आदमी समझता था और इसलिये उसे देखकर डरता था, और वह उसकी बातों को अच्छी तरह से सुनता था।
इसके बाद राज्यपाल के जन्म दिन में उसके सब खास-खास आदमी, दरबारी और सेनापति आये थे, क्योंकि उनको राज्यपाल ने आमंत्रित किया था। उसी दिन हेरोदिया को एक अच्छा मौका मिल गया और उसने अपनी लड़की को नाचने के लिये महल में भेजा। उस लड़की ने इतना अच्छा नाच दिखाया जिसे देखकर राज्यपाल और मेहमान खुश हो गये। तब राज्यपाल ने वायदा किया, “तू जो भी मांगेगी, मैं दूंगा, वह चाहे मेरा आधा राज्य ही क्यों ना हो!”
तब लड़की अपनी मां के पास आयी और पूछा, “मां, मैं क्या मांगूँ?” तब मां ने कहा, “बेटी, तू कह दे कि मुझको गुरु योहन का सिर काट कर दिया जाए।” तब लड़की ने अन्दर जाकर राज्यपाल से कहा, “मुझे गुरु योहन का सिर काटकर एक थाली में दे दो!”
यह सुनकर राज्यपाल बहुत उदास हुआ, पर वह ना तो अपने वायदे को तोड़ना चाहता था और ना ही मेहमानों के सामने शर्मिंदा होना चाहता था, इसलिए उसने गुरु योहन का सिर काटने के लिये एक सैनिक को भेजा और वह कैद खाने में उसका सिर काट कर एक थाली में ले आया। तब राज्यपाल ने उसको लड़की को दे दिया और लड़की ने अपनी मां को दे दिया।
इसके बाद जब गुरु योहन के शिष्यों को इस बात के बारे में पता चला, वे आकर उसकी लाश को ले गये और उसे दफना दिया।
गुरु योहन की मौत
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?