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32. एक दूसरे देश की औरत प्रभु येशु में विश्वास करती है

(मरकुस 7:24-30)

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तब येशु जी उस स्थान को छोड़कर सोर नगर के आस-पास के जगह की ओर चले गये। वहां वे एक घर में गये, और वे नहीं चाहते थे कि किसी को भी उनके आने का पता चले, लेकिन वे अपने को छिपा नहीं सके। एक यूनानी औरत जिसकी लड़की में भूत था, वह येशु जी के बारे में सुनकर उनके पास आई और उनके पाँवों में गिर गईं। और विनती करने लगी, कि मेरी लड़की में से भूत को निकाल दीजिए।

येशु जी ने उसका विश्वास परखने के लिये उससे कहा, “तू तो यहुदीन नहीं, तेरी मदद करना तो वैसा हो जैसे कि एक पिता अपने बच्चों के खाने को बच्चों को देने से पहले कुत्तों को दे दें।“

तब औरत ने उसको उत्तर दिया, “ठीक है प्रभु, लेकिन कुत्ते भी बच्चों के जूठे-पीठे को खा लेते हैं!” येशु जी ने उससे कहा, “इस उत्तर के कारण तू बे फिकर होकर अपने घर जा, तेरी लड़की ठीक हो गयी है।” और जब वह औरत अपने घर लौटी, तब उसने देखा कि उसकी लड़की चुपचाप अपने चारपाई में सो रही है और भूत भी निकल गया है।

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग