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39. प्रभु येशु एक लड़के को भूत से मुक्त कर देते हैं

(मरकुस 9:14-29)

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जब येशु जी और उनके तीन शिष्य वहां आये जहां दूसरे शिष्य थे, तब उन्होंने देखा कि बहुत लोग उनके चारों ओर जमा हो रहे हैं और वे धर्म गुरुओं के साथ बहस कर रहे हैं। और जब लोगों ने येशु जी को वहां आते देखा, तब उन्होंने आकर उनको प्रणाम किया।

तब येशु जी ने शिष्यों से पूछा, “तुम इनके साथ बहस क्यों कर रहे हो?” इतने में भीड़ में से एक आदमी ने उत्तर दिया, “गुरु जी, मैं अपने पुत्र को यहां लाया हूँ कि आप उसको अच्छा कर देंगे, क्योंकि उस में एक भूत है जो उसको बोलने नहीं देता। और जहां-तहां वह भूत उसको पकड़ कर दबा देता है, उसके मुंह से झाग आता है, वह दांत पीसता और फिर अकड़ जाता है। इसलिये मैंने आपके शिष्यों से भूत को निकालने के लिये कहा, लेकिन वे नहीं निकाल सके।”

यह सुनकर येशु जी ने अपने शिष्यों से कहा, “हद है तुम्हारे लिये, क्या तुम को अभी तक मुझ पर भरोसा नहीं है? मैं कितने दिन तक तुम्हारे साथ रहूंगा कि तुम विश्वास करोगे, और तुम्हारे अविश्वास को मैं कब तक सहन करूंगा? जाओ, उस लड़के को मेरे पास लाओ।” और वे उसको उनके पास ले आये और येशु जी को देखकर भूत ने लड़के को मरोड़ दिया और उसके मुंह से झाग आने लगा और वह मिट्टी में लोट पोट करने लगा।

तब येशु जी ने उस लड़के के पिता से पूछा, “यह भूत इसे कब से लगा है?” उसने बताया, “बचपन से। और यह भूत इसे इसी तरह परेशान नहीं करता बल्कि आग और पानी में भी फेंक देता है, जहां यह मर जाये। अगर तुम कुछ कर सकते हो तो हम पर दया करके हमारी मदद करो।” येशु जी ने उससे कहा, “अगर-मगर वाली कोई भी बात नहीं है। मैं उनके लिये सब कुछ कर सकता हूं जो मुझ में विश्वास करते हैं।” तब लड़के के पिता ने जोर देकर कहा, “मेरे पास विश्वास है, आप मेरे विश्वास को बढ़ाने में मेरी मदद करें!”

जब येशु जी ने देखा कि भीड़ बढ़ती जा रही है, उन्होंने भूत को डांटकर कहा, “हे बहरी और गूंगी आत्मा, मैं तुझसे कहता हूं कि इसमें से चला जा और फिर इसमें कभी दुबारा मत आना!” और तब वह भूत चिल्लाते हुए उस लड़के को मरोड़कर उस में से चला गया और वह लड़का मुरदा सा हो पड़ा। और लोग ऐसा कहने लगे कि यह मर गया है। लेकिन येशु जी ने उस लड़के का हाथ पकड़ कर उसको उठाया और वह खड़ा हो गया, और वह बिल्कुल अच्छा भी हो गया!

जब वहां से येशु जी और उनके शिष्य घर आये, तब एकांत में उनके शिष्यों ने उनसे पूछा, “हम उस भूत को क्यों नहीं निकाल सके?” येशु जी ने उत्तर दिया, “ऐसे प्रकार के भूतों को तुम केवल प्रार्थना करके निकाल सकते हो क्योंकि इनको निकालने का और कोई दूसरा चारा नहीं है।”

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग