(मरकुस 10:17-31)
येशु जी जब रास्ते-रास्ते कहीं जा रहे थे, उस समय एक आदमी दौड़कर उनके पास आया और उसने उनके सामने घुटने टेक कर ऐसा पूछा, “उत्तम गुरु जी, परमात्मा के साथ हमेशा रहने के लिये मैं क्या करूं?”
येशु जी ने उससे कहा, “मुझे उत्तम क्यों कहता है? परमात्मा को छोड़ कर और कोई भी उत्तम नहीं हैं। तू परमात्मा की दी हुई आज्ञा को जानता ही है - हत्या नहीं करना, कुकर्म ना करना, चोरी ना करना, झूठी गवाही ना देना, झूठ बोलकर किसी से कुछ ना लेना, अपने माता-पिता के लिये अच्छा करना।” उसने कहा, “गुरु जी, इन सभी बातों को मैं बचपन से मानता हूं।”
उसको देखकर येशु जी के मन में प्रेम आ गया। उन्होंने उससे कहा, “तूने एक काम और भी नहीं किया। जा, जो भी तेरे पास है, उसको बेचकर जो पैसे मिले उनको तू गरीबों में बांट दे। फिर उसके बाद तू मेरे साथ आ जाना। और तब तुझे परम स्वर्ग में असली धन मिलेगा।” यह सुनकर उस आदमी के मुंह का रंग काला हो गया और वह निराश होकर वहां से चला गया, क्योंकि उसके पास बहुत धन-सम्पत्ति थी और उसके लिये इसे छोड़ना बहुत मुश्किल था।
तब येशु जी ने शिष्यों से कहा, “धनवानों के लिये परमात्मा के राज्य में पहुंचना कितना मुश्किल है!” शिष्य येशु की यह बात सुनकर चकित हुए, लेकिन येशु जी ने उनसे फिर कहा, “साथियों, जो धन में विश्वास रखते हैं, उनके लिये परमात्मा के राज्य में पहुंचना बहुत मुश्किल है। परमात्मा के राज्य में एक धनवान के पहुंचने से अधिक सरल ऊंट का सूई के छेद में से बाहर निकलना आसान है।”
यह सुनकर शिष्य और भी अधिक चकित हो पड़े और एक दूसरे के साथ बात-चीत करने लगे, “अगर ऐसा है तब किसका उद्धार हो सकता है?” येशु जी ने उनसे कहा, “लोगों के लिये तो यह असंभव है लेकिन परमात्मा के लिये सब कुछ संभव है।”
इतने में पारस ने कहा, “गुरु जी, देखो, हम अपना सब कुछ छोड़ कर आपके शिष्य बन गये हैं।” येशु जी ने कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो भी आदमी मेरे और शुभ संदेश के लिये अपना घर, माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे और खेत खलिहान सब को छोड़ देगा, वह यह सब कुछ को सौ गुना अधिक पायेंगे। पहले उसको बहुत परेशानी भी उठानी पड़ेगी, लेकिन इसके बदले में उसको आने वाले समय में अमृत जीवन भी मिलेगा।
बहुत लोग जो इस संसार की नजर में बड़े हैं, वे परमात्मा के राज्य में छोटे करे जायेंगे और जो लोग संसार के नजर में छोटे हैं, वे परमात्मा के राज्य में बड़े करे जायेंगे।”
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?