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05. परमात्मा के वायदे का पूरा होना

(लुका 2:21-33)

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जब यह बच्चा आठ दिन का हो गया, तब उस दिन यहूदियों की रीति के अनुसार उनका खतना हुआ। उस दिन योसफ और मरियम ने उनका नाम येशु रखा। यह नाम परमात्मा ने उस समय मरियम को अपने दूत के द्वारा बताया था, जब मरियम गर्भवती नहीं थी।

इसके कुछ समय बाद मरियम और योसफ इस्राएलियों की राजधानी यरुशलेम में भेंट चढ़ाने के लिये गये, जैसा परमात्मा का नियम था कि हर औरत जब उसका बच्चा हो, तब वे यहां आकर मेरे लिये भेंट चढ़ाये। और वहां परमात्मा के मंदिर में शिमयौन नाम का एक आदमी था, जिससे परमात्मा ने वायदा किया था कि जब तक तू अपनी आँखों से लोगों के मुक्तिदाता को नहीं देख लेगा, तब तक तू नहीं मरेगा। जब योसफ और मरियम मंदिर में थे, तब शिमयौन भी परमात्मा की इच्छा से वहां आया, और परमात्मा ने शिमयौन को बताया, “यह वही है!” तब शिमयौन ने उस बच्चे को अपनी गोद में पकड़ कर परमात्मा को धन्यवाद देकर उनकी महिमा की। उसने कहा, “मैंने अपने आँखों से लोगों को छुड़ाने वाले को देख लिया है, अब मैं शांति से मर सकता हूं।” फिर उसने ये भी कहा, “यह बच्चा इस्राएलियों के लिये गर्व का कारण और अन्य जातियों के लिये उजाला होगा। लेकिन लोग इसके खिलाफ भी खड़े होंगे।” इसके बाद उसने बच्चे को आशीर्वाद देकर उसकी मां को दे दिया।

और मरियम और योसफ इन सब बातों को सुनकर चकित रह गये।

मंदिर में शिमयौन अपनी आँखों से मुक्तिदाता को देखता है

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग