(मरकुस 10:32-34)
इसके बाद येशु जी अपने शिष्यों के साथ यरुशलेम के रास्ते में जा रहे थे। उनके शिष्य और साथ-साथ आने वाले लोग डरे हुए थे, क्योंकि जहां येशु जी जा रहे थे वहां के लोग उनके खिलाफ है, फिर भी येशु जी वहां क्यों जा रहे हैं? तब येशु जी अपने बारह शिष्यों को अलग ले जाकर उनको बताने लगे कि मुझ पर क्या बीतेगी। उन्होंने कहा, “देखो, हम यरुशलेम जा रहे हैं और वहां मैं पुरोहितों के साहब और धर्म गुरु के हाथ में सौंपा जाऊंगा और वे मुझे जान से मारने के लायक ठहराएंगे और रोमी सरकार के हाथ में सौंप देंगे और रोमी मेरा निरादर करेंगे, मुझ पर थूकेंगे, मुझे चाबुक से मारेंगे और मुझे मार देंगे, लेकिन मैं मरने के तीसरे दिन फिर ज़िंदा करा जाऊंगा।”
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?