(मरकुस 10:46-52)
इसके बाद जब वे यरीहो नगर से जा रहे थे, तब उस समय सड़क के किनारे में एक अंधा भीख मांग रहा था, जिसका नाम बरतिमाई था। जब उसने सुना कि इस रास्ते से येशु जी जा रहे हैं, तब उसने आवाज लगाकर कहा, “हे येशु जी, दाविद राजा के वंश के, मुझ पर तरस खाओ!” बहुत लोगों ने उसको डांट कर कहा, “चुप रह!” पर वह और भी जोर से आवाज लगाकर कहने लगा, “हे दाविद के वंश के येशु जी, मुझ पर दया करो!”
और येशु जी ने रुक कर कहा, “उसको यहां लाओ।” और लोगों ने अंधे से कहा, “धीरज रख कर उठ, वह तुझे बुला रहे हैं!” जब उसने ऐसा सुना, तब वह एकदम उठा, और वह अपनी चादर को फेंक कर येशु जी के पास आया। येशु जी ने कहा, “मैं तुम्हारे लिये क्या कर सकता हूं?” अंधे ने कहा, “हे गुरु जी, मैं देखना चाहता हूं!” येशु जी ने कहा, “तुम ने मुझ में विश्वास रखा, इसलिये मैं तुम को ठीक करता हूँ।” और उस समय वह देखने लगा और येशु जी के साथ चला गया।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?