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55. विश्वास से सब कुछ हो सकता है

(मरकुस 11:20-26)

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जब दूसरे दिन येशु जी और शिष्य फिर यरुशलेम के रास्‍ते जा रहे थे, तब उन्होंने अंजीर के उस पेड़ को फिर देखा जिसको येशु जी ने श्राप दे रखा था, और वह अच्छी तरह सूख गया था। तब पारस ने येशु जी से कहा, “गुरु जी, देखो, अंजीर के पेड़ जिसको आपने श्राप दिया था, वह सुख गया है।”

येशु जी ने उत्तर दिया, “ताजूब नहीं करो, लेकिन परमात्मा में विश्वास रखो। मैं तुम से कहता हूं, जो भी विश्वास से इस पहाड़ से कहेगा, उठ और समुद्र में गिर जा, और अपने मन में भ्रम नहीं करेगा बल्कि ये विश्वास करेंगे कि जो मैं कहता हूं, वह हो जाएगा, तब उसके लिये वैसा ही हो जाएगा। इसलिये मैं तुम से कहता हूं कि जो तुम प्रार्थना में मांगते हो, विश्वास करो कि वह तुम को मिलेगा, और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।”

और येशु जी ने फिर कहा, “जब तुम प्रार्थना करने के लिये तैयार होते हो, तब उस समय अगर किसी ने भी तुम्हारे लिये बुरा किया हो, तब पहले उसको माफ कर देना। फिर परमात्मा भी तुम्हारे अपराधों को माफ करेंगे। लेकिन अगर हम दूसरों के अपराधों को माफ नहीं करेंगे, तब हमारे पिता परमात्मा भी हमारे अपराधों को माफ नहीं करेंगे”

मनन और चर्चा करने के लिए कुछ सवाल

1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?

2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?

3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?

4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?

5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?

येशु सत्संग