(मरकुस 14:27-31)
चलते-चलते येशु जी ने अपने शिष्यों से कहा, “तुम सब का विश्वास भी जाता रहेगा, क्योंकि धर्म-ग्रंथ में ऐसा लिख रखा है कि मैं चरवाहे को मार दूंगा और भेड़ इधर-उधर भटक जायेंगे। लेकिन जीवित करे जाने के बाद मैं तुम सब से पहले गलील प्रदेश को जाऊँगा।”
पारस ने येशु जी से कहा, “गुरु जी, आपने कहा कि हम सबका विश्वास जाता रहेगा। और सब का विश्वास जाएगा तो जाएगा, लेकिन मेरा विश्वास बिल्कुल नहीं जाएगा!” यह सुनकर येशु जी ने उससे कहा, “मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज रात मुर्गे के दो बार बांग देने से पहले, तू तीन बार अपने मुँह से मेरा इनकार करेगा।” लेकिन पारस ने और भी अधिक जोर देकर कहा, “चाहे मुझे तुम्हारे साथ मरना भी पड़ेगा, तब भी मैं तुम्हारा इनकार बिल्कुल नहीं करूंगा।” और सब ने भी ऐसा ही कहा।
1) इस वचन में आपको क्या अच्छा लगा? क्या पसंद नहीं आया?
2) इस वचन से आप परमात्मा के बारे में क्या सीखते हैं?
3) इस वचन से आप मनुष्यों के बारे में क्या सीखते हैं?
4) इस वचन से हमें अपने जीवन में क्या पालन करना चाहिए?
5) इस वचन को आप किस के साथ बाँटेंगे और कब?